Supreme Court Decision on TET : देशभर में लाखों शिक्षक इस समय भारी तनाव और असमंजस की स्थिति से गुजर रहे हैं। वजह है सुप्रीम कोर्ट का हालिया ऐतिहासिक फैसला, जिसमें साफ कहा गया है कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले हर शिक्षक को अब शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य होगा। कोर्ट के इस आदेश का सबसे बड़ा असर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और तमिलनाडु जैसे राज्यों पर पड़ रहा है। केवल इन चार राज्यों में ही 34 लाख से ज्यादा शिक्षक सीधे प्रभावित होंगे।
Supreme Court Decision on TET
उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षकों की चिंता को देखते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को रिवीजन बेंच में चुनौती देने का निर्णय लिया है। यानी अब अंतिम फैसला आने तक असमंजस की स्थिति बनी रहेगी। शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह कदम उनकी लगातार उठाई जा रही मांगों का नतीजा है।
किन शिक्षकों पर होगा सीधा असर?
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में यह स्पष्ट किया है कि शिक्षक की योग्यता पर कोई समझौता संभव नहीं है।
- सरकारी स्कूल : नई भर्ती केवल उन्हीं की होगी जिन्होंने TET पास किया है। जो पहले से नौकरी में हैं और जिनकी सेवा अवधि 5 साल से अधिक शेष है, उन्हें भी दो साल के भीतर परीक्षा पास करनी होगी।
- प्राइवेट (गैर-अल्पसंख्यक) स्कूल : अब प्रबंधन मनमाने तरीके से बिना TET पास किए किसी को नियुक्त नहीं कर पाएगा।
- अल्पसंख्यक स्कूल : मामला अभी लंबित है और इसे 7 जजों की बड़ी बेंच को भेजा गया है।
प्रभावित होने वाले शिक्षकों की संख्या
देशभर में लगभग 50 लाख शिक्षक कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाते हैं।
- उत्तर प्रदेश: करीब 16 लाख
- मध्य प्रदेश: लगभग 7 लाख
- राजस्थान: करीब 8 लाख
- तमिलनाडु: करीब 3 लाख
यानी सिर्फ इन चार राज्यों में ही 34 लाख से ज्यादा शिक्षक इस फैसले से प्रभावित होंगे।
शिक्षकों का गुस्सा और पीड़ा | Supreme Court Decision on TET
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षकों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है। मेरठ के एक प्रधानाचार्य विनोद कौशिक ने कहा—“जो शिक्षक 15-20 साल से पढ़ा रहे हैं, उनके अनुभव पर सवाल उठाना अपमानजनक है। अब ये शिक्षक बच्चों को पढ़ाएं या खुद TET की तैयारी करें?”
दूसरी ओर एसडी इंटर कॉलेज के कार्यवाहक प्रधानाचार्य अरुण कुमार का कहना है कि सरकार को शिक्षकों की स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करनी ही चाहिए, क्योंकि लाखों शिक्षक मानसिक तनाव में हैं और इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
शिक्षक संगठन भी मैदान में
माध्यमिक शिक्षक संघ ने इस फैसले को अनुचित करार दिया और चेतावनी दी कि आगे चलकर यह आदेश माध्यमिक स्तर के शिक्षकों पर भी लागू हो सकता है।
वंही प्राथमिक शिक्षक संघ ने एलान किया है कि 11 तारीख को प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा और 13 तारीख को सांसदों को भी ज्ञापन दिया जाएगा। अगर समाधान नहीं निकला तो राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन होगा।
क्यों बढ़ा विवाद?
कई शिक्षकों का आरोप है कि 2011 से पहले टीईटी परीक्षा का प्रावधान ही नहीं था। अब इतने साल बाद पहले से नौकरी कर रहे शिक्षकों पर यह नियम लागू करना अन्याय है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार की 2017 की सिफारिश पर ही यह आदेश आया है और अगर इसे वापस नहीं लिया गया तो शिक्षक आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।
Supreme Court Decision on TET | कानूनी पक्ष
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ईलिन सारस्वत का कहना है कि यह फैसला 1 सितंबर 2025 को आया और अब यह नियम 2009 में लागू हुए शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून से पहले नियुक्त शिक्षकों पर भी लागू होगा। यानी सेवा में बने रहने या प्रमोशन पाने के लिए अब हर शिक्षक को TET पास करना ही होगा।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने शिक्षा व्यवस्था को हिला कर रख दिया है। एक तरफ सरकार और कोर्ट का तर्क है कि शिक्षक की योग्यता पर समझौता नहीं हो सकता, वहीं दूसरी तरफ लाखों शिक्षक इसे अपने अनुभव और वर्षों की मेहनत का अपमान मान रहे हैं। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की रिवीजन बेंच पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में तय करेगी कि देशभर के लाखों शिक्षकों और करोड़ों बच्चों की पढ़ाई का भविष्य किस दिशा में जाएगा।
MP Police Constable Recruitment 2025 – Application Process [ esb.mp.gov.in ] लिंक ऐक्टिव
Gold – Silver Rate 16 Sep 2025 : देखें आज का ताज़ा भाव
Sukanya Samriddhi Account : 5 साल की बेटी को एक मुश्त मिलेंगे 25 लाख रुपए, देखें पूरी गणना










